
गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक बयान में कहा कि आज भारत की विदेश नीति उसकी रीढ़ की हड्डी बन चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तुलना देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल से करते हुए कहा कि जिस तरह नेहरू जी के समय विदेश नीति भावनाओं और आदर्शवाद पर आधारित थी, वहीं मोदी जी के समय यह नीति राष्ट्रहित, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की सोच पर टिकी है।
अमित शाह ने कहा कि आज दुनिया का कोई भी बड़ा निर्णय भारत को नज़रअंदाज़ करके नहीं लिया जा सकता। चाहे वह G20 की अध्यक्षता हो, ब्रिक्स सम्मेलन, या फिर संयुक्त राष्ट्र में भारत का रुख—हर जगह भारत की भूमिका निर्णायक साबित हो रही है। गृहमंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने विदेश नीति को केवल कूटनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास का अहम स्तंभ बना दिया है।
नेहरू की विदेश नीति का ज़िक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि उस समय भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैतिकता और पंचशील जैसे सिद्धांतों पर बल देता था। लेकिन कई बार इससे भारत को रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध इसका उदाहरण है। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने “पहले देश, फिर दुनिया” के सिद्धांत को अपनाकर विदेश नीति को और मजबूत बनाया।
अमित शाह ने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं और वैश्विक मंचों पर उनकी सक्रियता ने भारत की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। आज भारत को एक विश्वसनीय साझेदार, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और निर्णायक नेतृत्व के रूप में देखा जाता है।
विदेश नीति के नए आयामों पर चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को सुधारने, आतंकवाद पर वैश्विक सहयोग को बढ़ाने और प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों में भारतीय समुदाय के लिए विशेष योजनाएँ चलाई गई हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि आज भारत की विदेश नीति केवल सरकार का एजेंडा नहीं बल्कि जनभागीदारी का माध्यम बन चुकी है। विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिक भी अब देश की शक्ति और प्रभाव का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
अमित शाह ने यह दावा भी किया कि मोदी सरकार की कूटनीति ने भारत की सैन्य और आर्थिक ताकत को भी नया आयाम दिया है। चाहे रक्षा सौदे हों, प्रौद्योगिकी सहयोग हो, या फिर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता—हर जगह विदेश नीति की अहम भूमिका है।
अंत में शाह ने कहा कि आज भारत का हर नागरिक गर्व से कह सकता है कि उसकी विदेश नीति ही उसकी रीढ़ की हड्डी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे न केवल मज़बूत किया है बल्कि इसे हर भारतीय के आत्मविश्वास से भी जोड़ा है।



