
देश की सुरक्षा और भविष्य के युद्धों में सफलता के लिए आत्मनिर्भरता का महत्व अत्यधिक है। हाल ही में एयर मार्शल भारती ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि भारत की रक्षा क्षेत्र में प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो रही है। उनका कहना है कि अगर भारत भविष्य के तकनीकी युद्धों में पीछे रह गया, तो देश की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता केवल हथियार और उपकरण बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रक्षा तकनीक, अनुसंधान, और नवीनतम तकनीकी विकास को अपनाना भी शामिल है।
एयर मार्शल भारती के अनुसार, दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीकी युद्ध अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहे। ड्रोन्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, और हाइपरसोनिक मिसाइल जैसी तकनीकें युद्ध की प्रकृति बदल रही हैं। इस बदलते परिदृश्य में आत्मनिर्भरता भारत के लिए रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में धीमी प्रगति को देखते हुए हमें अपने अनुसंधान और विकास संस्थानों को और सशक्त करना होगा।
भारती ने बताया कि भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां तकनीकी प्रगति धीमी है। इसमें रक्षा उपकरणों का निर्माण, उच्च तकनीक वाले सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और आधुनिक विमान शामिल हैं। यदि ये क्षेत्रों में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में हमारी सेना को विदेशी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ेगा। उन्होंने युवाओं और वैज्ञानिकों से अपील की कि वे रक्षा अनुसंधान और तकनीकी विकास में योगदान दें, जिससे देश आत्मनिर्भर बन सके।
इसके अलावा एयर मार्शल ने सरकार और उद्योग जगत को भी चेतावनी दी कि रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक भी है। यदि भारत अपने रक्षा उपकरणों और तकनीक में आत्मनिर्भर बनता है, तो न केवल हमारी सेना मजबूत होगी, बल्कि हमारी रणनीतिक स्थिति भी वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ होगी।
अंततः एयर मार्शल भारती का संदेश स्पष्ट है: भविष्य के युद्ध जीतने के लिए आज से ही आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। भारत की रक्षा, सुरक्षा और तकनीकी प्रगति के लिए यह कदम न केवल आवश्यक है, बल्कि देश की सुरक्षा और सम्मान को बनाए रखने के लिए अनिवार्य भी है।



