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मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं, RSS पर सवाल उठाना अनुचित’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में संघ के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हिंदू धर्म भी कहीं पंजीकृत नहीं है, लेकिन उसका अस्तित्व और प्रभाव पूरी दुनिया में है।” भागवत ने यह टिप्पणी उन सवालों के जवाब में दी जो RSS की कानूनी पहचान और पंजीकरण को लेकर बार-बार उठाए जाते हैं।

मोहन भागवत ने कहा कि संघ कोई राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करने वाला सांस्कृतिक संगठन है। उन्होंने कहा, “हमारे कार्यों की पहचान हमारे सेवा कार्यों और समाज के लिए समर्पित कर्म से होती है, न कि किसी कानूनी कागज से।”

संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि आरएसएस का अस्तित्व किसी दस्तावेज़ पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह करोड़ों स्वयंसेवकों के समर्पण और अनुशासन से चलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह हिंदू धर्म या भारत की संस्कृति किसी पंजीकरण की मोहताज नहीं है, उसी तरह संघ भी अपने विचार और कर्म के बल पर समाज में अपनी जगह बना चुका है।

भागवत ने यह भी बताया कि संघ की गतिविधियाँ पारदर्शी हैं और समाज के हर वर्ग के लिए खुली हैं। “हम किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने के लिए काम करते हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज जब कुछ लोग संघ की नीयत या उद्देश्य पर सवाल उठाते हैं, तो वे वास्तव में उसके वास्तविक स्वरूप को नहीं समझते। संघ का लक्ष्य सत्ता पाना नहीं, बल्कि राष्ट्र को सशक्त बनाना और समाज को संगठित करना है।

मोहन भागवत का यह बयान न केवल RSS के विरोधियों के लिए जवाब के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि उन लोगों के लिए भी संदेश है जो संघ के कार्यों को लेकर भ्रमित हैं। उन्होंने कहा कि “संघ का कार्य सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर और आत्मगौरवशाली बनाना है।”

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