
भारतीय वायुसेना (IAF) का एक इजरायली ड्रोन बुधवार सुबह राजस्थान के जैसलमेर जिले के पास तकनीकी खराबी के चलते क्रैश हो गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह ड्रोन वायुसेना के नियमित ऑपरेशनल मिशन का हिस्सा था, लेकिन उड़ान के दौरान अचानक आई तकनीकी दिक्कत की वजह से उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो गया और अंततः वह वीरान क्षेत्र में गिरकर क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।
ड्रोन के क्रैश होने के बाद वायुसेना ने तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है, जो इस घटना के तकनीकी और ऑपरेशनल कारणों की पड़ताल करेगी। प्राथमिक जांच में तकनीकी खराबी की संभावना जताई जा रही है, लेकिन सटीक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
IAF जिन इजरायली ड्रोन का उपयोग करती है, वे मुख्यतः ‘हेरोन’ श्रृंखला के हाई-एंड मानवरहित निगरानी सिस्टम हैं, जो सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये ड्रोन पाकिस्तान और चीन सीमा पर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए लगातार तैनात रहते हैं। ऐसे में ड्रोन का अचानक क्रैश होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय भी है, क्योंकि यह ऑपरेशनल क्षमता पर अस्थायी असर डाल सकता है।
जैसलमेर का इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यहां भारतीय सेना और वायुसेना संयुक्त रूप से कई महत्वपूर्ण अभ्यास और निगरानी मिशन चलाते हैं। इससे पहले भी पिछले वर्षों में कुछ मानवरहित हवाई वाहनों के क्रैश होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनका कारण अक्सर तकनीकी खामी या मौसम संबंधी दिक्कतें बताई गई थीं।
इस ताज़ा घटना के बाद यह फिर सवाल उठ रहा है कि क्या भारत को अब अपनी ड्रोन तकनीक को और अधिक आधुनिक बनाने की जरूरत है, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो और ऐसे हादसों को रोका जा सके। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय स्वदेशी UAV परियोजनाएं लगातार प्रगति पर हैं, लेकिन मौजूदा ऑपरेशन में इस्तेमाल हो रहे विदेशी ड्रोन की मेंटेनेंस और अपग्रेडिंग पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।



