
दिल्ली अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए अब अत्याधुनिक एंटी ड्रोन सिस्टम लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन से जुड़े सुरक्षा खतरों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष तकनीक की जरूरत महसूस होने लगी है। सुरक्षा एजेंसियों और एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा मिलकर किए जा रहे इस प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संदिग्ध या दुश्मन ड्रोन को रनवे, टर्मिनल या विमान संचालन क्षेत्र के पास आने से पहले ही निष्क्रिय कर दिया जाए।
एंटी ड्रोन सिस्टम में ऐसी आधुनिक तकनीकें शामिल होंगी जो दुश्मन ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और न्यूट्रलाइजेशन तीनों कार्य तुरंत कर सकें। रडार, कैमरा सेंसर, RF डिटेक्शन और जैमिंग तकनीक के माध्यम से सिस्टम ड्रोन के सिग्नल को कट कर उसे हवा में ही निष्क्रिय कर देगा। इसके साथ ही, यह सिस्टम ड्रोन की लोकेशन और उड़ान मार्ग की जानकारी भी सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत भेजेगा, जिससे किसी भी संभावित खतरे को कुछ ही सेकंड में खत्म किया जा सकेगा।
दिल्ली एयरपोर्ट जैसा बड़ा यात्री केंद्र, जहां रोज करोड़ों यात्रियों का आवागमन होता है, वहां सुरक्षा में एक छोटी सी चूक भी बड़े खतरे में बदल सकती है। इसलिए ड्रोन आधारित खतरों को रोकने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले समय में देश के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों पर ड्रोन दिखने की घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया था। ऐसे में दिल्ली एयरपोर्ट पर यह सिस्टम लगना पूरे देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा संदेश है।
एंटी ड्रोन सिस्टम लगने से विमान उड़ान और लैंडिंग संचालन पर भी अधिक सुरक्षा कवच मिलेगा। यह तकनीक रात के समय, खराब मौसम और कम दृश्यता में भी समान दक्षता के साथ कार्य कर सकती है। इसके साथ ही, सुरक्षा एजेंसियों को रियल टाइम अलर्ट मिलने से निर्णय लेने की गति भी बढ़ेगी। इससे न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि एयरपोर्ट संचालन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं को भी कम किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, दिल्ली एयरपोर्ट पर एंटी ड्रोन सिस्टम लगाने की तैयारी यह संकेत देती है कि भारत अब हाई-टेक सुरक्षा मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह कदम न केवल दुश्मन तत्वों पर अंकुश लगाएगा, बल्कि देश की हवाई सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।



