
DGP-IG सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, माओवाद और कश्मीर की स्थिति पर महत्वपूर्ण और निर्णायक बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई दशकों से चली आ रही चुनौतियों का न केवल समाधान खोजा, बल्कि उन्हें स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। “माओवाद से लेकर कश्मीर की समस्या का स्थायी समाधान मोदी सरकार ने दिया है,”—अमित शाह के इस बयान ने सरकार की सुरक्षा नीतियों की मजबूती को स्पष्ट रूप से दर्शाया।
उन्होंने बताया कि एक समय देश का बड़ा हिस्सा माओवादी हिंसा से प्रभावित था, लेकिन पिछले 10 वर्षों में सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति, विकास कार्यों की गति और स्थानीय जनभागीदारी ने माओवाद को लगभग समाप्ति की ओर पहुँचा दिया है। आज अधिकांश जिलों में माओवाद पूरी तरह नियंत्रण में है और युवा मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं।
कश्मीर को लेकर अमित शाह ने कहा कि धारा 370 हटाने के बाद घाटी में नई उम्मीद, नए अवसर और नई स्थिरता देखने को मिली है। पहले जहां अलगाववाद और आतंकी गतिविधियाँ चरम पर थीं, वहीं अब विकास, पर्यटन और रोजगार के नए अध्याय खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पर केंद्र सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित अभियान ने स्थिति में अभूतपूर्व सुधार किया है।
अमित शाह ने देश के पुलिस बलों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था दुनिया में सबसे मजबूत और आधुनिक होती जा रही है। उन्होंने आधुनिक तकनीक, डेटा-आधारित सुरक्षा व्यवस्था, ड्रोन निगरानी, साइबर सुरक्षा और पुलिस सुधारों पर भी विस्तार से चर्चा की।
गृह मंत्री ने राज्यों के सभी पुलिस अधिकारियों से कहा कि देश के सामने आने वाली नई चुनौतियों, जैसे साइबर अपराध, नारकोटिक्स, अवैध हथियार तस्करी और सीमा पार से आने वाले आतंकी प्रयासों से लड़ने के लिए एकजुटता और तकनीकी तैयारी बेहद आवश्यक है।
यह सम्मेलन देश की आंतरिक सुरक्षा का रोडमैप तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जहाँ अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब किसी भी समस्या को लंबा खिंचने नहीं देगा—बल्कि निर्णायक और स्थायी समाधान ही नई नीति है।



