
भारतीय सेना की क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत ने इजरायल से अत्याधुनिक हेरॉन Mk II (Heron Mark-II) ड्रोन खरीदने की डील को अंतिम रूप दे दिया है। यह आधुनिक निगरानी ड्रोन भारतीय सेना की ऑपरेशनल स्ट्रेंथ को कई गुना बढ़ा देगा, खासकर सीमाई क्षेत्रों में जहां दुश्मन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी होता है। हेरॉन Mk II एक हाई-एंड अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) है, जो अपनी रफ्तार, ऊंची उड़ान क्षमता और लंबे समय तक हवा में बने रहने की ताकत की वजह से किसी भी सैन्य मिशन में बेहद कारगर साबित होता है।
यह ड्रोन अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सिस्टम और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) तकनीक से लैस है, जो इसे दुश्मन की गतिविधियों को दूर से ही पकड़ने और विश्लेषण करने में सक्षम बनाती है। इसकी खासियत यह है कि यह खराब मौसम, रात और दुर्गम इलाकों में भी समान क्षमता के साथ निगरानी कर सकता है। इसके आने से भारतीय सेना को वास्तविक समय में बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस मिलेगी, जिससे सैन्य रणनीतियाँ और भी सटीक और प्रभावी बनेंगी।
हेरॉन Mk II की रफ्तार और स्टेल्थ डिज़ाइन इसे दुश्मन के रडार से भी काफी हद तक बचाए रखती है। यह 30 घंटे से भी अधिक समय तक लगातार उड़ान भर सकता है, जो किसी भी निगरानी मिशन के लिए आदर्श है। इसके माध्यम से भारत चीन और पाकिस्तान की सीमा पर संवेदनशील इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख सकेगा। खासकर लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिमी सीमाओं पर इसका उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इजरायल के साथ यह डील भारत-इजरायल रक्षा सहयोग की मजबूती को भी दर्शाती है। दोनों देशों के बीच पहले से कई हाई-टेक रक्षा परियोजनाएँ चल रही हैं, और अब हेरॉन Mk II के जुड़ने से यह साझेदारी और मजबूत होगी। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विदेशी तकनीक के साथ भारतीय क्षमताओं में इजाफा करने की रणनीति के अनुरूप भी है।
कुल मिलाकर, हेरॉन Mk II का भारतीय सेना में शामिल होना एक गेम-चेंजर साबित होगा। यह न केवल सीमाओं पर निगरानी को मजबूत बनाएगा बल्कि दुश्मन को मानसिक रूप से भी दबाव में रखेगा। आने वाले समय में यह ड्रोन भारत की सामरिक शक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और सेना की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।



