
भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंध एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर अमेरिका की नाराजगी सामने आने के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बेहद साफ और दो टूक शब्दों में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत-रूस के संबंधों पर किसी तीसरे देश का वीटो नहीं चल सकता और भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने का पूरा अधिकार रखता है। भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं और इनकी नींव आपसी विश्वास, सहयोग और साझा हितों पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रिश्ते को किसी एक घटना या वैश्विक राजनीतिक दबाव के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि आज की दुनिया बहुध्रुवीय (मल्टी-पोलर) हो चुकी है, जहां देशों को अपने हितों के अनुसार संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनानी होती है। भारत न तो किसी गुट की राजनीति में विश्वास करता है और न ही किसी एक देश के कहने पर अपने पुराने साझेदारों को छोड़ सकता है। उन्होंने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि भारत सभी बड़े देशों के साथ अपने संबंध समानांतर रूप से आगे बढ़ाता है।
पुतिन की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है। रूस भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है, जबकि तेल और गैस के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। जयशंकर ने संकेत दिया कि इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे तथा क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर समन्वय को और गति मिलेगी।
अमेरिका की नाराजगी पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध ‘अनुमति’ या ‘दबाव’ से नहीं, बल्कि वास्तविकताओं और राष्ट्रीय हितों से संचालित होते हैं। भारत ने हमेशा अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर गर्व किया है और भविष्य में भी यही राह जारी रखेगा। उनके इस बयान को वैश्विक मंच पर भारत के आत्मविश्वास और कूटनीतिक स्पष्टता के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि भारत अपने फैसले खुद लेना जानता है।



