
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में दीपावली का शामिल होना भारत के लिए गर्व और सांस्कृतिक गौरव का क्षण है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा है, जो दुनिया को प्रकाश, सकारात्मकता और मानवता का संदेश देती है। दीपों का यह पर्व सदियों से भारतीय संस्कृति में अज्ञान पर ज्ञान, बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की प्रतीकात्मक विजय को दर्शाता आया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि दीपावली का वैश्विक मान्यता पाना भारत की उस समृद्ध परंपरा का सम्मान है, जो विविधता में एकता, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव के भाव को हर पीढ़ी से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया वैश्विक शांति और सांस्कृतिक समरसता की तलाश में है, दीपावली जैसे पर्व मानवता को एक साझा मंच प्रदान करते हैं।
दीपावली को यूनेस्को की सूची में शामिल करने से इसे न केवल विश्वस्तरीय सांस्कृतिक पहचान मिली है, बल्कि भारतीय परंपराओं की उस गहरी आध्यात्मिक दृष्टि को भी मान्यता मिली है जो जीवन में प्रकाश और आशा के महत्व को रेखांकित करती है। यह त्योहार भारत के हर कोने में विविध रूपों में मनाया जाता है—कहीं इसे भगवान राम की अयोध्या वापसी के प्रतीक के रूप में, कहीं समृद्धि और लक्ष्मी की पूजा के रूप में, तो कहीं इसे फसलों के उत्सव और नए सत्र की शुरुआत के रूप में। इस विविधता में निहित एकता ने ही दीपावली को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बना दिया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज जब दुनिया विभिन्न चुनौतियों से जूझ रही है, दीपावली का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। यह पर्व हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी ही कठिन क्यों न हों, आशा का दीप जलाकर आगे बढ़ना ही मानव का असली स्वभाव है।
यूनेस्को में इस मान्यता के बाद भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा मिली है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। दीपावली के माध्यम से विश्व अब भारतीय संस्कृति की उस उज्ज्वल परंपरा से और गहराई से जुड़ सकेगा, जिसमें प्रेम, शांति, प्रकाश और मानवता सर्वोपरि हैं।



