भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ, मुख्यमंत्री योगी ने किया दीपप्रज्ज्वलन

भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन कर तथा दीपप्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय के सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक बना, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक क्षण भी सिद्ध हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय सांस्कृतिक चेतना का एक सशक्त केंद्र रहा है, जिसने देश-विदेश में भारतीय संगीत और कला की पहचान को मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री ने विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे जी के योगदान को स्मरण किया और कहा कि उनके प्रयासों से भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक व्यवस्थित शैक्षणिक स्वरूप मिला। प्रदर्शनी में संगीत, नृत्य, वाद्ययंत्रों, दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक चित्रों के माध्यम से विश्वविद्यालय की शताब्दी यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने अत्यंत प्रेरणादायी बताया।
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय जैसे संस्थान न केवल कला शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, साधना और भारतीय मूल्यों का संचार भी करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कला और संस्कृति को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भारतीय परंपराओं की जड़ें और अधिक मजबूत होंगी।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और कलाकारों को शताब्दी वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह वर्ष आत्ममंथन और नवाचार का अवसर है। उन्होंने आह्वान किया कि विश्वविद्यालय अपनी गौरवशाली विरासत को संजोते हुए आधुनिक तकनीक और वैश्विक मंच के अनुरूप स्वयं को और अधिक सशक्त बनाए। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और भारतीय कला की समृद्ध परंपरा को एक बार फिर उजागर किया।
कुल मिलाकर, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष का यह उद्घाटन समारोह सांस्कृतिक गौरव, ऐतिहासिक चेतना और भविष्य की दिशा तय करने वाला एक यादगार आयोजन साबित हुआ।



