
ऑक्सफोर्ड यूनियन में आयोजित एक डिबेट के दौरान भारतीय और पाकिस्तानी छात्रों के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारत-पाक संबंधों और आतंकवाद के मुद्दे को केंद्र में ला दिया। इस डिबेट में भारतीय छात्र ने बेहद स्पष्ट और सख्त शब्दों में पाकिस्तान की नीतियों पर सवाल उठाए और 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि “बेशर्म देश को शर्मिंदा नहीं किया जा सकता।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर दुनियाभर में चर्चा शुरू हो गई है।
डिबेट के दौरान पाकिस्तानी छात्र ने कश्मीर और मानवाधिकारों का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय छात्र ने तथ्यों और उदाहरणों के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब भी पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकारों की बात करता है, तो वह खुद अपने इतिहास और वर्तमान से मुंह फेर लेता है। भारतीय छात्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुंबई हमले भारत के लिए सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं थे, बल्कि वह एक कड़वा सबक थे, जिसने देश को आतंकवाद के खिलाफ और अधिक सतर्क और मजबूत बनाया।
भारतीय छात्र ने आगे कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहा है और दुनिया के सामने खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आतंकवादी खुलेआम भारत पर हमले करते हैं और बाद में पाकिस्तान में सुरक्षित पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है? इस बयान पर डिबेट हॉल में मौजूद श्रोताओं की प्रतिक्रिया भी देखने लायक थी।
डिबेट का यह हिस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ऑक्सफोर्ड यूनियन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर भारत की ओर से एक छात्र ने बिना किसी झिझक के आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका पर खुलकर बात की। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने भारतीय छात्र की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने भावनाओं के बजाय तर्क और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखी।
कुल मिलाकर, ऑक्सफोर्ड यूनियन की यह डिबेट सिर्फ छात्रों के बीच विचारों की टकराहट नहीं थी, बल्कि यह उस व्यापक सच्चाई को भी दर्शाती है, जिसमें भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने अनुभवों और सबकों को दुनिया के सामने रख रहा है। यह बहस आने वाले समय में भी भारत-पाक संबंधों पर चर्चा का अहम संदर्भ बन सकती है।



