हमारे पड़ोसी दुर्भाग्य से अच्छे नहीं’, जयशंकर का सख्त संदेश—भारत अपनी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर बेहद स्पष्ट और मजबूत रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि “दुर्भाग्य से हमारे पड़ोसी अच्छे नहीं हैं,” और ऐसे माहौल में भारत अपनी रक्षा को लेकर किसी से पूछने या अनुमति लेने की स्थिति में नहीं है। उनका यह बयान न सिर्फ मौजूदा क्षेत्रीय हालात को दर्शाता है, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच और आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति को भी रेखांकित करता है।
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत अपने पड़ोस में लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। सीमापार आतंकवाद, सीमा विवाद, और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे लंबे समय से भारत के लिए चिंता का विषय रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर देश को अपने नागरिकों और सीमाओं की रक्षा का अधिकार है, और भारत इस अधिकार का प्रयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।
विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भारत की विदेश नीति आदर्शवाद से अधिक यथार्थवाद पर आधारित है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में भारत शांति और सहयोग का पक्षधर रहा है, लेकिन जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तो भारत किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठा सकता। उन्होंने कहा कि भारत संवाद में विश्वास करता है, लेकिन कमजोरी दिखाने का सवाल ही नहीं उठता।
जयशंकर के मुताबिक, वैश्विक मंच पर भी भारत अब पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख रहा है। रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना, स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना और रणनीतिक साझेदारियों को संतुलित ढंग से आगे बढ़ाना—ये सभी कदम भारत की उसी सोच का हिस्सा हैं, जिसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत किसी देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने में सक्षम और तैयार है। चाहे वह सीमा पर जवाबी कार्रवाई हो, कूटनीतिक दबाव हो या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात मजबूती से रखना—भारत अब स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, जयशंकर का यह बयान भारत की बदली हुई सोच को दर्शाता है, जहां सुरक्षा, संप्रभुता और आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी रक्षा के लिए किसी से पूछने की जरूरत नहीं समझता—यही संदेश इस बयान का सार है।



