
दुनिया की राजनीति में अगर कभी कोई घटना सबसे ज्यादा सनसनीखेज मानी जाएगी, तो वह होगी सिर्फ 30 मिनट में किसी देश के राष्ट्रपति का अपहरण। दावा किया जा रहा है कि वेनेजुएला में ऐसा ही एक चौंकाने वाला सैन्य ऑपरेशन अंजाम दिया गया, जिसमें अमेरिकी सेना ने अभूतपूर्व ताकत का प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में करीब 150 सैन्य एयरक्राफ्ट शामिल थे, जिन्होंने एक साथ वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर पूरे देश को हिला कर रख दिया। कहा जा रहा है कि यह मिशन बेहद गोपनीय था और इसकी योजना महीनों पहले तैयार की गई थी। जैसे ही ऑपरेशन को हरी झंडी मिली, अमेरिकी फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और ड्रोन ने एक साथ कार्रवाई शुरू कर दी।
सूत्रों का कहना है कि राजधानी कराकास में राष्ट्रपति भवन को कुछ ही मिनटों में चारों ओर से घेर लिया गया। कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम कर दिया गया ताकि वेनेजुएला की सेना और सरकार आपस में संपर्क न कर सकें। इसी दौरान विशेष बलों की टीम ने राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान से बाहर निकाल लिया। दावा है कि पूरी कार्रवाई इतनी तेज और सटीक थी कि स्थानीय सुरक्षा बलों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। 30 मिनट के भीतर राष्ट्रपति को एयरक्राफ्ट के जरिए देश से बाहर ले जाया गया और ऑपरेशन समाप्त घोषित कर दिया गया।
इस कथित कार्रवाई के पीछे वजह के तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय हितों का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि वेनेजुएला सरकार समर्थकों का कहना है कि यह खुला सैन्य हस्तक्षेप और संप्रभुता पर सीधा हमला है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस घटना को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ देश इसे सत्ता परिवर्तन की साजिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे रणनीतिक मजबूरी करार दे रहे हैं।
150 एयरक्राफ्ट की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक सीमित सैन्य ऑपरेशन नहीं था, बल्कि ताकत का बड़ा प्रदर्शन भी था। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ऐसा ऑपरेशन वास्तव में हुआ है, तो यह आधुनिक सैन्य इतिहास की सबसे तेज और निर्णायक कार्रवाइयों में से एक होगा। फिलहाल सच्चाई को लेकर कई सवाल खड़े हैं, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पूरी दुनिया की नजरें वेनेजुएला पर टिका दी हैं और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक और कूटनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।



