
पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जनरेशन Z यानी युवा पीढ़ी द्वारा नेतृत्व किए गए विरोध प्रदर्शनों ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि शहबाज शरीफ नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी गंभीर राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। शुरुआत में यह आंदोलन विश्वविद्यालयों में शिक्षा शुल्क वृद्धि, परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (ई‑मार्किंग) जैसे मुद्दों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही यह व्यापक राजनीतिक असंतोष में बदल गया। छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों ने जल्द ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और कई स्थानों पर सड़कों पर उतर आए। विरोध के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा और टकराव की खबरें भी आईं, जिससे सरकारी प्रतिष्ठा पर दबाव बढ़ा।



