हर गली-मोहल्ले में हनुमान चालीसा का संदेश: प्रवीण तोगड़िया बोले, भेदभाव छोड़कर संगठित हों हिंदू

भारत में हिंदुओं की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति को लेकर विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने एक बार फिर बयान देकर चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि देश में हिंदू समाज संख्या और प्रभाव—दोनों स्तरों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में समय की मांग है कि हिंदू भेदभाव, जाति-पंथ और आपसी मतभेदों को भूलकर संगठित हों। तोगड़िया के अनुसार, सामाजिक विखंडन और राजनीतिक उपेक्षा के कारण हिंदू समाज कमजोर पड़ता दिख रहा है, जिसका समाधान केवल सांस्कृतिक एकजुटता और जमीनी स्तर पर सक्रियता से संभव है। उन्होंने ‘हर गली-मोहल्ले में हनुमान चालीसा’ के पाठ का आह्वान करते हुए इसे आस्था के साथ-साथ सामाजिक चेतना और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया। तोगड़िया ने कहा कि हनुमान चालीसा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि अनुशासन, साहस और सेवा-भाव जैसे मूल्यों को भी पुष्ट करती है, जो समाज को जोड़ने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आगे आने, परिवारों और मोहल्लों में नियमित सामूहिक गतिविधियों के जरिए संवाद बढ़ाने और सामाजिक कार्यों में भागीदारी की अपील की। तोगड़िया का यह भी कहना है कि जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हिंदू समाज को तथ्यात्मक समझ विकसित करनी चाहिए और शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का अर्थ टकराव नहीं, बल्कि समन्वय, सेवा और संवैधानिक दायरे में रहकर सामाजिक सशक्तिकरण है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश की विविधता और संविधान का सम्मान करते हुए सभी समुदायों के साथ सौहार्द बना रहना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही हिंदू समाज को आत्मविश्वास और पहचान के साथ आगे बढ़ना होगा। तोगड़िया के इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं—समर्थकों का कहना है कि यह सांस्कृतिक जागरण का आह्वान है, जबकि आलोचक इसे विभाजनकारी बताते हैं। कुल मिलाकर, बयान ने एक बार फिर धर्म, समाज और राजनीति के संबंधों पर बहस को केंद्र में ला दिया है, जहां संगठन, आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन खोजने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।



