
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोंगल के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए तमिल संस्कृति की प्राचीनता और समृद्ध परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, जिसने मानवता को भाषा, साहित्य, कला और सामाजिक मूल्यों की अमूल्य धरोहर दी है। पीएम मोदी ने पोंगल को केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, परिश्रम और कृतज्ञता का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व किसानों की मेहनत, धरती मां के प्रति सम्मान और सूर्य देव की आराधना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा की वैज्ञानिकता और उसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भाषा भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि विविधताओं से भरा भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों के कारण ही एक सूत्र में बंधा है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि पोंगल जैसे पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की सीख देते हैं, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी परंपराओं पर गर्व करें और आधुनिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी संजोएं। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक तमिल वेशभूषा, लोकनृत्य और संगीत ने उत्सव की शोभा बढ़ाई। प्रधानमंत्री ने किसानों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि अन्नदाता देश की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कृषि और ग्रामीण विकास की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। पीएम मोदी के संबोधन से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि भारत की प्राचीन सभ्यताएं आज भी देश की पहचान और शक्ति का आधार हैं, और पोंगल जैसे त्योहार उस निरंतर सांस्कृतिक प्रवाह का जीवंत उदाहरण हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी भारत को समृद्ध बनाता आ रहा है।



