
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक पंजाब में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला, जिसके चलते यह मिशन कमजोर पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और उससे जुड़े तत्व ड्रग्स व अवैध हथियारों की तस्करी के जरिए पंजाब की सामाजिक शांति को नुकसान पहुंचाने और युवाओं को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की बरामदगी के मामलों में बढ़ोतरी इस खतरे की ओर इशारा करती है। हालांकि सुरक्षा बलों की सख्ती, खुफिया निगरानी और राज्य–केंद्र के समन्वय से इन प्रयासों को नाकाम करने की कार्रवाई लगातार जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ISI पंजाब में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए पहले हिंसक आंदोलन और अब ड्रग्स और हथियारों के नेटवर्क का सहारा ले रही है। राज्य के कई जिलों में युवाओं को नशे की लत में फंसाने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उन्हें चरमपंथी तत्वों के प्रभाव में लाना आसान हो जाता है।
सुरक्षा एजेंसियों ने कई मामलों में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के रूट और लिंक का खुलासा किया है, जिनमें पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क सक्रिय पाए गए हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें रडिकलाइज करने के लिए किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने पुलिस और खुफिया तंत्र को और मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों और शिक्षा संस्थानों के माध्यम से नशा मुक्ति और जागरूकता कार्यक्रम तेज कर दिए हैं। उनका उद्देश्य युवाओं को चरमपंथ और अपराध की ओर जाने से रोकना और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना है।



