
NATO देशों की नाराजगी के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सुर बदलते हुए ब्रिटिश सैनिकों की खुलकर तारीफ की है। हाल ही में दिए गए एक बयान में ट्रम्प ने अफगानिस्तान में शहीद हुए ब्रिटिश सैनिकों को “महान योद्धा” बताते हुए उनके बलिदान को याद किया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब NATO के कई सहयोगी देशों में ट्रम्प की पूर्व टिप्पणियों को लेकर असंतोष देखा गया था। उनके इस बदले हुए रुख को कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रम्प ने कहा कि अफगानिस्तान मिशन के दौरान ब्रिटेन सहित कई सहयोगी देशों के सैनिकों ने असाधारण साहस और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने विशेष रूप से उन ब्रिटिश सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान गंवाई। ट्रम्प के अनुसार, इन सैनिकों का बलिदान केवल उनके देश के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए था। उनके शब्दों में, “जो अफगानिस्तान में शहीद हुए, वे सच्चे महान योद्धा थे।”
इस बयान को NATO देशों के साथ रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे पहले ट्रम्प के कुछ बयानों और नीतिगत रुख को लेकर यूरोपीय सहयोगी देशों ने आपत्ति जताई थी। खासकर रक्षा खर्च और साझा जिम्मेदारियों के मुद्दे पर ट्रम्प की कड़ी टिप्पणियों ने विवाद को जन्म दिया था। ऐसे में ब्रिटिश सैनिकों की प्रशंसा और उनके बलिदान को सम्मान देना, सहयोगी देशों को भरोसा दिलाने का प्रयास माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल ब्रिटेन के साथ संबंधों में सकारात्मक संदेश गया है, बल्कि NATO गठबंधन की एकता पर भी जोर दिया गया है। अफगानिस्तान मिशन भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन वहां किए गए बलिदान आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा विमर्श का अहम हिस्सा हैं।
कुल मिलाकर, ट्रम्प का बदला हुआ सुर यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बयानबाजी और कूटनीति का संतुलन कितना जरूरी है। ब्रिटिश सैनिकों की तारीफ कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सहयोगी देशों के योगदान और बलिदान का सम्मान किया जाना चाहिए। यह कदम NATO देशों के साथ रिश्तों को सुधारने और भविष्य में बेहतर समन्वय की दिशा में एक अहम संकेत माना जा सकता है।



