
वेनेजुएला के बाद अब एक बार फिर अमेरिका पर किसी अन्य देश में तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप तेज हो गए हैं। इस बार चर्चा का केंद्र ईरान बताया जा रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि “कुछ सरकारें अब ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं हैं” और “बहुत जल्द बदलाव देखने को मिलेगा।” हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका इशारा ईरान की मौजूदा सरकार की ओर था।
बीते कुछ वर्षों से अमेरिका और ईरान के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक टकराव और सैन्य तनाव लगातार बढ़ते रहे हैं। अमेरिका पहले ही ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा चुका है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान इस आशंका को और मजबूत करता है कि अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष दबाव बना सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अमेरिका अक्सर आर्थिक प्रतिबंधों, अंतरराष्ट्रीय दबाव और विपक्षी समूहों के समर्थन के जरिए किसी देश की सरकार को कमजोर करने की रणनीति अपनाता है। वेनेजुएला इसका बड़ा उदाहरण है, जहां अमेरिका ने खुलकर विपक्षी नेता का समर्थन किया था। अब वही पैटर्न ईरान के मामले में दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसकी सरकार मजबूत है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
ट्रंप के बयान के बाद मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। अगर अमेरिका वाकई ईरान में सत्ता परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो इसका असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल अमेरिका की आधिकारिक नीति क्या होगी, यह साफ नहीं है, लेकिन ट्रंप के शब्दों ने इतना जरूर तय कर दिया है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।



