
2047 तक भारत के एविएशन सेक्टर में ऐतिहासिक विस्तार देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार की दीर्घकालिक योजना के अनुसार आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक देश में 400 से अधिक हवाईअड्डे संचालित होंगे। वर्तमान में भारत में लगभग 150 के आसपास एयरपोर्ट, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम हैं, लेकिन UDAN योजना, क्षेत्रीय संपर्क और बढ़ती हवाई यात्रियों की संख्या को देखते हुए आने वाले वर्षों में इसमें तेज़ी से इज़ाफा किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल महानगरों को, बल्कि छोटे शहरों और दूर-दराज़ के इलाकों को भी हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।
दुनिया के सबसे ज्यादा हवाईअड्डों वाले देशों की बात करें तो अमेरिका इस लिस्ट में पहले नंबर पर है। अमेरिका में 13,000 से अधिक एयरपोर्ट और एयरस्ट्रिप्स हैं, जिनमें छोटे निजी हवाई पट्टियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े एयरपोर्ट शामिल हैं। दूसरे नंबर पर ब्राज़ील आता है, जहां 4,000 से अधिक हवाईअड्डे हैं। इसके बाद मेक्सिको, कनाडा और रूस जैसे बड़े क्षेत्रफल वाले देश शामिल हैं, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हवाई यातायात की भूमिका बेहद अहम है।
भारत अभी इस लिस्ट में शीर्ष पर नहीं है, लेकिन 2047 तक 400 से ज्यादा एयरपोर्ट होने के बाद भारत दुनिया के अग्रणी एविएशन देशों में शुमार हो जाएगा। खास बात यह है कि भारत का फोकस सिर्फ संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किफायती हवाई यात्रा, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्गो नेटवर्क को मजबूत करने पर भी है। इससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दुनिया में कुछ ऐसे देश और क्षेत्र हैं जहां एक भी एयरपोर्ट नहीं है। वेटिकन सिटी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां सीमित भौगोलिक क्षेत्र के कारण कोई हवाईअड्डा मौजूद नहीं है। इसके अलावा मोनाको जैसे छोटे देशों में भी अलग से एयरपोर्ट नहीं है और वे पड़ोसी देशों के हवाईअड्डों पर निर्भर रहते हैं। कुल मिलाकर, भारत का एविएशन सेक्टर जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, वह आने वाले दशकों में देश को वैश्विक हवाई मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने वाला है।



