
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कुछ यूरोपीय देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि इन शक्तियों ने जानबूझकर क्षेत्र में विरोध और अस्थिरता की आग भड़काई है, जिससे शांति और स्थिरता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब ईरान और पश्चिमी देशों के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप और प्रतिबंधों के पीछे एक संगठित रणनीति है। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों, नेतन्याहू की आक्रामक रणनीति और यूरोप के दोहरे मानदंडों ने मध्य पूर्व में जनता के गुस्से को हवा दी है। उन्होंने कहा कि इन कदमों का मकसद ईरान को अलग-थलग करना और क्षेत्रीय राजनीति में अस्थिरता पैदा करना है।
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिमी ताकतें मानवाधिकार और लोकतंत्र की बात तो करती हैं, लेकिन व्यवहार में वे ऐसे कदम उठाती हैं, जो संघर्ष और हिंसा को बढ़ावा देते हैं। पेजेश्कियान के अनुसार, जब ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा की बात करता है, तो उसे धमकियों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है, जबकि इजरायल जैसे देशों की कार्रवाइयों पर आंखें मूंद ली जाती हैं।
उन्होंने यूरोपीय देशों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यूरोप स्वतंत्र नीति अपनाने के बजाय अक्सर अमेरिका और इजरायल के दबाव में फैसले करता है। इससे न केवल ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद कमजोर होता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अविश्वास का माहौल बनता है। पेजेश्कियान ने जोर देकर कहा कि यदि सच में शांति स्थापित करनी है, तो पश्चिमी देशों को हस्तक्षेप और उकसावे की राजनीति छोड़नी होगी।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह निष्पक्ष रवैया अपनाए और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए निकाले। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान टकराव नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से समझौता भी नहीं करेगा। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।



