प्रदूषण पर काबू के संकेत, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव बोले- हालात पहले से बेहतर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझती रही है, खासकर सर्दियों के मौसम में जब स्मॉग की परत शहर को ढक लेती है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ हद तक बदली हुई नजर आ रही है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी है कि इस सर्दी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) केवल 10 दिनों के लिए ही ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा, जो पिछले वर्षों की तुलना में राहत भरी खबर मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयास, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का सख्त पालन और प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार निगरानी के कारण यह सुधार संभव हुआ है।
मंत्री ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं में कमी, निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण, धूल प्रबंधन और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर सख्ती जैसे कदमों का असर साफ दिख रहा है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच भी महत्वपूर्ण साबित हुई है। सरकार का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल ने नतीजे देने शुरू कर दिए हैं।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी जश्न मनाने का समय नहीं है। दिल्ली-एनसीआर की भौगोलिक स्थिति और मौसम की भूमिका भी प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करती है। हवा की रफ्तार, तापमान और नमी जैसे कारक कई बार प्रदूषकों को जमने का मौका देते हैं। इसलिए दीर्घकालिक समाधान के लिए सतत नीतियों, स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज बदलाव और लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है।
पर्यावरण मंत्रालय का जोर है कि आने वाले वर्षों में ‘गंभीर’ दिनों की संख्या और कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए डेटा आधारित रणनीतियां तैयार की जा रही हैं और रियल टाइम मॉनिटरिंग को मजबूत किया जा रहा है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो उम्मीद है कि दिल्लीवासियों को भविष्य में और साफ हवा मिल सकेगी। फिलहाल, इस सर्दी के आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि सही दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।



