
भारत और यूरोप के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पांच यूरोपीय देशों के प्रमुखों से अहम मुलाकात की। इन बैठकों को भारत की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। एफटीए के बाद यह संवाद इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और तकनीकी सहयोग का भी मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है।
प्रधानमंत्री ने जिन देशों के नेताओं से मुलाकात की, उनमें Germany, France, Italy, Spain और Netherlands शामिल हैं। इन बैठकों में रक्षा, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्टार्टअप सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
एफटीए के लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। वहीं, यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाजार और निवेश का आकर्षक केंद्र बनकर सामने आया है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भारत और यूरोप लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति समान दृष्टिकोण रखते हैं, जो दोनों पक्षों को और करीब लाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुलाकातों से भारत-यूरोप संबंधों में नई ऊर्जा का संचार होगा। रक्षा उत्पादन में सह-निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में संयुक्त निवेश और नई तकनीकों के आदान-प्रदान से दोनों क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा, वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधाओं से निपटने में भी यह सहयोग अहम भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, एफटीए के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह कूटनीतिक पहल भारत की वैश्विक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में इन समझौतों और संवादों का असर भारत की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।



