बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 23,500 हेक्टेयर में गो-आधारित मॉडल लागू

उत्तर प्रदेश की बुंदेलखंड क्षेत्र को प्राकृतिक खेती का केंद्र बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 23,500 हेक्टेयर भूमि पर गो-आधारित प्राकृतिक खेती की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, लागत कम करना और भूमि की उर्वरता को प्राकृतिक तरीके से सुधारना है।
बुंदेलखंड लंबे समय से सूखा और जल संकट जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। ऐसे में रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना क्षेत्र के लिए एक टिकाऊ समाधान माना जा रहा है। गो-आधारित प्राकृतिक खेती में देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य जैविक घोलों का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसलों की पैदावार में भी सुधार आता है।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इस मॉडल को और अधिक गांवों तक विस्तारित किया जाए। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कृषि विभाग की टीमों द्वारा गांव-गांव जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखाई जा रही है। साथ ही स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को भी इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती से न केवल उत्पादन लागत में कमी आएगी, बल्कि किसानों को बाजार में जैविक उत्पादों के बेहतर दाम भी मिलेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव होगी।
योगी सरकार का यह प्रयास ‘आत्मनिर्भर किसान’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना सफल होती है, तो बुंदेलखंड देश में प्राकृतिक खेती का मॉडल क्षेत्र बन सकता है और अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत भी साबित होगा।



