
भारत तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। सरकार की विशलिस्ट में ऐसा इंडिपेंडेंट AI सिस्टम शामिल है, जिस पर देश का पूर्ण नियंत्रण हो और जिसकी तकनीक, डेटा व इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह भारत के अधिकार में हो। इस पहल का मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करना है। वर्तमान में वैश्विक AI प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से अमेरिका और चीन की कंपनियों के नियंत्रण में हैं, जिससे डेटा सुरक्षा और नीतिगत नियंत्रण को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं। ऐसे में भारत ‘फुल कंट्रोल’ मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें सर्वर, एल्गोरिद्म, ट्रेनिंग डेटा और संचालन तंत्र देश के भीतर ही विकसित और संचालित हों। इस योजना में सबसे अहम सवाल ‘किल स्विच’ को लेकर है—यानी आपात स्थिति में AI सिस्टम को तुरंत बंद या सीमित करने का अधिकार किसके पास होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह अधिकार संभवतः केंद्र सरकार के अधीन किसी अधिकृत एजेंसी या राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद जैसे उच्चस्तरीय निकाय को दिया जा सकता है, ताकि दुरुपयोग या साइबर हमले की स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके। इसके साथ ही बहु-स्तरीय निगरानी तंत्र, एथिकल AI फ्रेमवर्क और पारदर्शी रेगुलेशन की भी योजना बनाई जा रही है। सरकार चाहती है कि यह AI सिस्टम रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो, लेकिन उसके संचालन पर मानवीय नियंत्रण बना रहे। ‘किल स्विच’ को केवल अंतिम विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, ताकि तकनीक का लाभ भी मिले और जोखिम भी नियंत्रित रहें। कुल मिलाकर भारत की यह पहल डिजिटल संप्रभुता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, जिसमें तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।



