
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट की पहली बैठक आज ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित हो रही है, जिसे प्रतीकात्मक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। आम तौर पर कैबिनेट बैठकों में नीतिगत फैसलों, विधेयकों और प्रशासनिक प्रस्तावों पर चर्चा होती है, लेकिन इस बार सिर्फ एजेंडा ही नहीं बल्कि मंत्रियों से उनके-अपने मंत्रालयों की ‘गुड न्यूज’ भी साझा करने को कहा गया है। सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना, 100 दिन की कार्ययोजना पर फोकस तय करना और जनता तक सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। ‘सेवा तीर्थ’ का चयन भी इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है, जहां सेवा, सुशासन और जनकल्याण के प्रतीक के रूप में सरकार अपने कामकाज की दिशा तय करना चाहती है। मंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने विभागों में हुए ठोस सुधार, नई योजनाओं की प्रगति और आम लोगों को मिले सीधे लाभ के उदाहरण पेश करें। इससे एक ओर जवाबदेही तय होगी तो दूसरी ओर मंत्रालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा। माना जा रहा है कि बैठक में बुनियादी ढांचे, डिजिटल गवर्नेंस, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर खास चर्चा हो सकती है। प्रधानमंत्री पहले भी ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की बात दोहराते रहे हैं और यह बैठक उसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट की इस नई कार्यशैली से सरकार अपने प्रदर्शन को आंकड़ों और उपलब्धियों के जरिए पेश करना चाहती है, जिससे जनता के बीच भरोसा और मजबूत हो। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बैठक से कौन-कौन से बड़े फैसले और सकारात्मक संदेश निकलकर सामने आते हैं।



