
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ट्राम सेवा की 153वीं सालगिरह बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाई गई। शहर की पहचान मानी जाने वाली ट्राम आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोए सड़कों पर दौड़ती नजर आती है। इस खास मौके पर ट्रामों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया, जबकि कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। पुराने और नए कोलकातावासियों ने इस दिन को यादगार बनाने के लिए ट्राम यात्रा का आनंद लिया और तस्वीरें खिंचवाकर सोशल मीडिया पर साझा कीं।
कोलकाता ट्राम सेवा की शुरुआत 19वीं सदी में हुई थी और यह एशिया की सबसे पुरानी चलती ट्राम सेवाओं में से एक मानी जाती है। सालगिरह के अवसर पर शहर की सड़कों पर विशेष हेरिटेज ट्राम चलाई गई, जिसमें इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों और युवाओं के लिए ट्राम के भीतर छोटी-सी प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें पुराने टिकट, तस्वीरें और ट्राम के विकास की झलक दिखाई गई।
इस आयोजन के दौरान स्थानीय कलाकारों ने लोक संगीत और नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को और जीवंत बना दिया। कई वरिष्ठ नागरिकों ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह ट्राम ने दशकों तक शहर की जीवनरेखा का काम किया। पर्यावरण के लिहाज से भी ट्राम को एक स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन साधन के रूप में देखा जाता है, इसलिए इस अवसर पर हरित परिवहन के महत्व पर भी जोर दिया गया।
153वीं सालगिरह का यह जश्न सिर्फ एक परिवहन सेवा का उत्सव नहीं था, बल्कि कोलकाता की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का उत्सव भी था। लोगों ने इस खास दिन को भावनाओं और गर्व के साथ मनाया, मानो शहर की आत्मा सड़कों पर उतर आई हो।



