
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को फिर से सक्रिय कर दिया है। Donald Trump के बढ़ते दबाव और सख्त रुख के बीच ओमान ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रखने के समझौते पर विचार करने को तैयार है। मध्य-पूर्व की राजनीति में ओमान अक्सर एक शांत मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी उसने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमान के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित रखने पर सहमत हो सकता है, बशर्ते उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जाए।
ईरान पहले भी कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और शोध उद्देश्यों के लिए है, न कि हथियार बनाने के लिए। हालांकि अमेरिका ने हमेशा उस पर संदेह जताया है, खासकर तब से जब United States ने 2018 में परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था। उस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो गए थे। अब ओमान की पहल से एक बार फिर कूटनीतिक रास्ता खुलता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो न केवल मध्य-पूर्व में स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि और ठोस दस्तावेज सामने आना बाकी है, लेकिन ओमान के दावे ने वैश्विक समुदाय में उम्मीद की एक नई किरण जरूर जगा दी है। आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि यह पहल केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है या वास्तव में एक बड़े समझौते का रूप लेती है।



