
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संघर्ष के बीच खाड़ी देशों में रह रहे करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। हालिया हालात को देखते हुए Ministry of External Affairs लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया है। सरकार ने साफ किया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारी की गई है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar, Kuwait और Oman जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामकाजी और पेशेवर समुदाय रहता है। ये लोग वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था में भी रेमिटेंस के जरिए अहम भूमिका निभाते हैं। मौजूदा संघर्ष की पृष्ठभूमि में भारतीय दूतावासों ने 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, ताकि जरूरतमंद नागरिक तुरंत संपर्क कर सकें।
सरकार ने एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। साथ ही, दूतावासों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां से लगातार हालात की समीक्षा की जा रही है। यदि स्थिति बिगड़ती है, तो निकासी योजना (एवाक्यूएशन प्लान) को भी सक्रिय किया जा सकता है। पहले भी संकट के समय भारत ने सफलतापूर्वक अपने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिससे लोगों में भरोसा कायम है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखा गया है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—हर भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करना। मौजूदा हालात भले ही चिंताजनक हों, लेकिन भारत ने यह संदेश दिया है कि वह अपने नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।



