
भारत द्वारा एक ईरानी जहाज को शरण देने के फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे सवालों के बीच विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट कहा है कि भारत ने जो कदम उठाया, वह पूरी तरह सही और मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय था। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और मानवीय मूल्यों का सम्मान करता आया है। ऐसे में जब संकट की स्थिति में एक जहाज को सहायता की जरूरत थी, तब भारत ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उसे सुरक्षित शरण दी। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत का रुख हमेशा से संतुलित और जिम्मेदार रहा है, खासकर तब जब क्षेत्रीय तनाव या संघर्ष की स्थिति हो। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी जहाज को शरण देने के फैसले को कुछ देशों ने राजनीतिक नजरिये से देखने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण से लिया गया कदम बताया है। विदेश मंत्री ने कहा कि समुद्र में संकटग्रस्त जहाजों की मदद करना अंतरराष्ट्रीय परंपरा और समुद्री कानून का हिस्सा है, और भारत इसी सिद्धांत पर काम करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार का राजनीतिक संदेश देने की मंशा नहीं थी, बल्कि प्राथमिकता जहाज और उसके चालक दल की सुरक्षा थी। भारत की विदेश नीति हमेशा से ‘संतुलन और संवाद’ पर आधारित रही है और कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है। जयशंकर के इस बयान के बाद यह साफ संकेत मिला है कि भारत अपने फैसले को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है और उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप मानता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि समुद्री संकट के समय सहायता देना किसी भी जिम्मेदार देश का कर्तव्य होता है और भारत ने वही भूमिका निभाई है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, भारत का यह कदम उसकी संतुलित और जिम्मेदार कूटनीति को दर्शाता है। विदेश मंत्री के बयान से यह भी स्पष्ट हो गया कि भारत अपनी नीतियों में मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय नियमों को प्राथमिकता देता रहेगा, चाहे परिस्थितियां कितनी भी जटिल क्यों न हों।



