
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव की वजह से कई देशों में गैस और ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारतीय शहरों में भी महसूस किया जा रहा है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के पुणे शहर में गैस की कमी के कारण कुछ गैस आधारित शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, जिन शवदाह गृहों में पाइपलाइन गैस या सीएनजी के जरिए अंतिम संस्कार की व्यवस्था होती है, वहां गैस की आपूर्ति बाधित होने से सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इससे लोगों को पारंपरिक लकड़ी वाले शवदाह गृहों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिससे व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया के कई देश दुनिया को तेल और गैस की बड़ी मात्रा में आपूर्ति करते हैं। वहां युद्ध या तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि गैस और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका असर केवल अंतिम संस्कार सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग भी इससे प्रभावित हो सकता है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में हजारों होटल और रेस्टोरेंट पाइपलाइन गैस या एलपीजी पर निर्भर हैं। यदि गैस की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है तो इन व्यवसायों को अस्थायी रूप से बंद करने की नौबत आ सकती है।
होटल एसोसिएशन के कई प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि गैस की उपलब्धता में कमी आने पर किचन संचालन करना मुश्किल हो जाएगा। इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा बल्कि हजारों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, आम उपभोक्ताओं के लिए भी खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं क्योंकि होटल और रेस्टोरेंट बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्दी सामान्य नहीं होते तो भारत समेत कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति के नए मार्गों पर काम कर रही है ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहे। फिलहाल स्थिति पर सरकार और उद्योग जगत दोनों की नजर बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी तक पहुंचने लगा है।



