
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों एक नई बहस छिड़ गई है, जिसमें अमेरिका, यूक्रेन, रूस और ईरान के रिश्तों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हाल ही में आई एक अमेरिकी रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि अगर अमेरिका यूक्रेन से अपनी दूरी बढ़ाता है, तो इसका सीधा असर रूस और ईरान के संबंधों पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि बदलते हालात में रूस अपने हितों को ध्यान में रखते हुए ईरान से दूरी बना सकता है, जिसे कुछ लोग ‘धोखा’ के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, इन अटकलों के बीच रूस ने आधिकारिक तौर पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि रूस और ईरान के बीच संबंध मजबूत और रणनीतिक हैं, जो किसी तीसरे देश के फैसलों पर निर्भर नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसमें रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों में बदलाव का असर वैश्विक शक्ति संतुलन पर जरूर पड़ेगा, लेकिन रूस और ईरान के संबंध इतने कमजोर नहीं हैं कि वे किसी एक घटना से टूट जाएं। दरअसल, दोनों देश लंबे समय से पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं और इस कारण उनके बीच सहयोग और भी मजबूत हुआ है।
इसके अलावा, मध्य-पूर्व और एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रूस और ईरान एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बने हुए हैं। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि रूस अपने हितों के लिए ईरान को छोड़ सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते, बल्कि देश अपने हितों के अनुसार फैसले लेते हैं।
फिलहाल, क्रेमलिन के बयान से यह साफ हो गया है कि रूस इन अटकलों को गंभीरता से नहीं ले रहा और वह ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में अमेरिका की विदेश नीति और यूक्रेन के हालात इस पूरे समीकरण को किस दिशा में ले जाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।



