
ऑस्ट्रेलिया में आयोजित प्रतिष्ठित ‘काकाडू’ नौसैनिक अभ्यास में भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि शामिल हुआ है। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में कई देशों की नौसेनाएं हिस्सा लेती हैं, जिससे आपसी तालमेल और समन्वय को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
आईएनएस नीलगिरि, भारत में निर्मित अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट है, जो अपनी उन्नत तकनीक और युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है। इस युद्धपोत की तैनाती से भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलती है। काकाडू अभ्यास में इसकी भागीदारी भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और वैश्विक समुद्री सहयोग में उसकी सक्रिय भूमिका को दर्शाती है।
इस अभ्यास के दौरान विभिन्न नौसेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास, समुद्री गश्त, खोज एवं बचाव अभियान, और समुद्री खतरों से निपटने के लिए प्रशिक्षण करती हैं। इससे न केवल सैन्य क्षमता में सुधार होता है, बल्कि आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत होती है। भारत के लिए यह अभ्यास खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएनएस नीलगिरि की भागीदारी से भारत को अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ आधुनिक युद्ध तकनीकों और रणनीतियों को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह भारत की समुद्री सुरक्षा नीति को भी मजबूती देगा। ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के रक्षा संबंध पहले से ही मजबूत हैं, और ऐसे अभ्यास इन संबंधों को और गहरा करते हैं।
कुल मिलाकर, काकाडू नौसैनिक अभ्यास में आईएनएस नीलगिरि की भागीदारी भारत की बढ़ती समुद्री ताकत, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ बनाता है।



