कलावा किस हाथ में बांधें? शादीशुदा और कुंवारी महिलाओं के लिए क्या है सही नियम

हिंदू धर्म में कलावा (मौली) को शुभता, रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पूजा, यज्ञ, व्रत और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा केवल एक धागा नहीं, बल्कि मंगल और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
परंपरागत मान्यता के अनुसार पुरुषों और अविवाहित (कुंवारी) महिलाओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना शुभ माना जाता है, जबकि विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ में कलावा बांधने की परंपरा बताई गई है। इसका संबंध धार्मिक अनुष्ठानों में स्त्री और पुरुष की अलग-अलग भूमिका तथा ऊर्जा के प्रतीकात्मक स्वरूप से जोड़ा जाता है।
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में दायां हाथ कर्म, संकल्प और सक्रियता का प्रतीक माना गया है, जबकि बाएं हाथ को सौभाग्य, गृहस्थ जीवन और स्त्री शक्ति से जोड़ा जाता है। इसी कारण विवाहित महिलाओं के लिए बाएं हाथ में मौली बांधने की परंपरा प्रचलित है।
हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में इस संबंध में कुछ भिन्न मान्यताएं भी देखने को मिल सकती हैं। इसलिए परिवार या गुरु परंपरा के अनुसार पालन करना भी उचित माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक भाव है, क्योंकि कलावा का मूल उद्देश्य ईश्वर की कृपा और सुरक्षा का स्मरण करना है।



