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अमेरिका, ब्रिटेन,जर्मनी समेत दुनिया के दिग्गजों का लखनऊ में होगा ‘टेक महाकुंभ’

देश-विदेश के करीब 1,200 नीति-निर्माता, उद्योगपति, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और युवा होंगे शामिल

लखनऊ, 20 सितंबर : अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत दुनिया के विभिन्न देशों के उद्यमी, टेक विशेषज्ञ और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि अगले महीने लखनऊ में जुटेंगे। मौका होगा उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में 23 से 25 अक्टूबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय इंटरनेशनल डायलॉग 2026 का। देश-दुनिया के करीब 1,200 नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप, न्यायिक व पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाने की तैयारी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, डाटा सुरक्षा और कानूनी अनुपालन तक भविष्य की तकनीकों पर यहां मंथन होगा।

यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के युवाओं को नई टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाया जा रहा है, जिससे रोजगार तथा नए अवसरों की असीम संभावनाएं बनेंगी। इसी उद्देश्य से इंटरनेशनल डायलॉग के जरिए नीति, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साझा मंच पर लाने की तैयारी है। अब इनोवेशन और रोजगारपरकता के जरिए विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जाएगा।

सबसे अधिक जोर इस बात पर दिया जा रहा है कि शैक्षणिक संस्थान रिसर्च और प्रतिभा तैयार करें और युवाओं के लिए इंटर्नशिप, रोजगार तथा नए अवसरों का रास्ता खुले।

फॉरेंसिक डीएनए, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य और आधुनिक जांच प्रणाली समझने का मिलेगा मौका

तीन दिन के इस वैश्विक संवाद के केंद्र में ऐसी तकनीकें होंगी, जो आने वाले वर्षों में उद्योग से लेकर सुरक्षा और न्याय व्यवस्था तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और 3-डी प्रिंटिंग के साथ क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम कम्युनिकेशन पर चर्चा की जाएगी। पोस्ट-क्वांटम तैयारियों और इस क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमता विकसित करने जैसे विषय भी विमर्श का हिस्सा होंगे। इसी तरह फॉरेंसिक डीएनए, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य और आधुनिक जांच प्रणालियों पर दुनिया भर के विशेषज्ञ विचार रखेंगे। इसके अलावा डाटा प्रोटेक्शन, प्राइवेसी, ऑडिट, गवर्नेंस और लीगल कंप्लायंस के जरिए नई तकनीक के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर रहेगा।

उद्योग से होगा सीधा संवाद

23 अक्टूबर का पहला दिन टैलेंट एंड इंडस्ट्री एंगेजमेंट के नाम रहेगा। इसका फोकस विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को सीधे उद्योग जगत से जोड़ने पर होगा। कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान इंटर्नशिप और प्लेसमेंट से लेकर भविष्य में जरूरी कौशल, तकनीकी मार्गदर्शन और मास्टरक्लास तक आयोजित करने की योजना है। तकनीकी प्रदर्शन के साथ स्टार्टअप को भी मंच मिलेगा। उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच रिसर्च, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके पीछे सोच युवाओं को केवल डिग्री देने तक सीमित न रहकर उन्हें उद्योग और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की है।

पॉलिसी-इंडस्ट्री राउंडटेबल, टेक्नोलॉजी शोकेस, इन्वेस्टमेंट डायलॉग और होगा नॉलेज एक्सचेंज

24 अक्टूबर इंटरनेशनल डायलॉग का मुख्य समिट दिवस होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और स्टार्टअप की भागीदारी की योजना है। इस दौरान पॉलिसी-इंडस्ट्री राउंडटेबल, टेक्नोलॉजी शोकेस, इन्वेस्टमेंट डायलॉग और नॉलेज एक्सचेंज जैसे कार्यक्रम होंगे। विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन तथा साझा शोध की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। इसका मकसद नीति बनाने वालों और तकनीक विकसित करने वालों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है।

युवाओं के लिए इंटर्नशिप से प्लेसमेंट तक का मंच : डॉ. जीके गोस्वामी

यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि समिट का एक बड़ा हिस्सा रोजगार और भविष्य के कौशल पर केंद्रित होगा। युवा पेशेवरों और विद्यार्थियों को मेंटर्स तथा उद्योग के विशेषज्ञों से जोड़ने के साथ इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और उद्यमिता नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम विकसित करने पर भी बातचीत होगी। इसके जरिए यूपीएसआईएफएस ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें शिक्षण संस्थानों से निकलने वाले युवा आधुनिक तकनीक को केवल सैद्धांतिक रूप से न जानें, बल्कि उसका व्यावहारिक इस्तेमाल भी समझें।

किताबों से लैब तक कानून, यूपीएसआईएफएस दिखाएगा ‘लॉ विथ लैब्स’

इंटरनेशनल डायलॉग में यूपीएसआईएफएस का ‘लॉ विथ लैब्स’ मॉडल भी प्रमुखता से सामने आएगा। इसकी अवधारणा कानून की पढ़ाई को वैज्ञानिक साक्ष्य और उभरती आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ने की है। यानी कानून की समझ से प्रयोगशाला, वैज्ञानिक साक्ष्य और अंततः न्याय तक की पूरी कड़ी। संस्थान में फॉरेंसिक डीएनए के साथ एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3-डी प्रिंटिंग, साइबर फॉरेंसिक और एडवांस डिजिटल डायग्नोस्टिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी प्रयोगशालाएं हैं। जिसका उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है जो तकनीक के इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े कानूनी और अनुपालन संबंधी पहलुओं को भी समझ सकें।

कंपनियों और स्टार्टअप के लिए भी खुलेगा मंच

टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप, लॉ फर्म, लीगल-टेक कंपनियों और कंप्लायंस से जुड़े संस्थानों को आयोजन में भागीदार बनने का अवसर दिया गया है। इसके लिए सिल्वर श्रेणी में पांच लाख रुपये या अधिक, गोल्ड में आठ लाख रुपये या अधिक और प्लेटिनम में 12 लाख रुपये या अधिक की श्रेणियां निर्धारित हैं। भागीदारी के जरिए टैलेंट डेवलपमेंट, तकनीकी प्रदर्शन, रिसर्च, प्रशिक्षण और पॉलिसी डायलॉग से जुड़ने के अवसर प्रस्तावित हैं। टैलेंट डेवलपमेंट, रिसर्च, इनोवेशन और पॉलिसी सपोर्ट के लिए आगे का रोडमैप तैयार करने की योजना है। यूपीएसआईएफएस इसमें सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सेतु की भूमिका निभाएगा।

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