कौन हैं अहवर रिजवी? उधार की गन से एशियन गेम्स तक का सफर
अहवर रिजवी का शूटिंग करियर बचपन से ही परिवार से जुड़ा रहा। उनके पिता, चाचा और परिवार के अन्य सदस्य शूटिंग करते थे। शुरुआत में उनके पास अपनी गन भी नहीं थी। उनके कजिन रायन रिजवी उन्हें अपनी गन इस्तेमाल करने देते थे। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान यह गन उनके लिए काफी बड़ी थी और रिकॉयल संभालने में उनके कजिन पीछे खड़े होकर मदद करते थे।
2018 में डबल ट्रैप में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बावजूद अहवर एशियन गेम्स टीम में जगह बनाने से सिर्फ एक अंक से चूक गए। इसके बाद डबल ट्रैप को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम से हटा दिया गया और अहवर को ट्रैप इवेंट में जाना पड़ा। नई स्पर्धा में खुद को ढालने में उन्हें कई साल लगे। 2024 और 2025 में भी वह चयन से चूक गए और एक समय उन्होंने शूटिंग छोड़ने का फैसला तक कर लिया था।
ट्रैप शूटिंग के लिए उचित गन की कमी भी उनके सफर में बड़ी चुनौती रही। बाद में एशियन गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट शूटर लक्ष्य श्योराण ने अपनी ट्रैप गन अहवर को दे दी। अहवर ने करीब एक साल तक उसी गन से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और चयन ट्रायल में हिस्सा लिया। अब उनकी अपनी गन का स्टॉक इटली में तैयार होकर प्रतियोगिता के मुताबिक सेट किया गया है।
अब आठ साल बाद अहवर रिजवी को एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। 2026 पुरुष ट्रैप टीम में उनके साथ कायनान चेनाई और शपथ भारद्वाज भी शामिल हैं। अहवर का लक्ष्य जापान में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन करना है। वह आगे 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर भी नजर रख रहे हैं।
अहवर शूटिंग के अलावा अपने परिवार के साथ खेती में भी हाथ बंटाते हैं। उन्होंने अपनी यात्रा को लेकर कहा है कि शूटिंग में दबाव और घबराहट के बीच ध्यान केंद्रित रखना जरूरी है। उनके लिए इस सफर का संदेश साफ है—हार के बाद भी दोबारा शुरुआत करना और लक्ष्य पर टिके रहना।



