धर्म-आस्था
गयाजी में पिंडदान: पितृ ऋण से मुक्ति, जानें गरुड़ पुराण का महत्व
गया तीर्थ के महत्व से जुड़ी पुराण कथा में गयासुर और भगवान विष्णु का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, इसी कारण गया क्षेत्र पितृ कर्मों के लिए विशेष माना गया। गरुड़ पुराण के वर्णन में गया के विभिन्न तीर्थों पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के अलग-अलग धार्मिक फल बताए गए हैं। फल्गु तीर्थ पर पिंडदान के बाद भगवान गदाधर विष्णु के दर्शन करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलने की मान्यता भी वर्णित है।
पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पितरों के निमित्त किए गए कर्मकांड से उन्हें तृप्ति और सद्गति प्राप्त होती है। गया क्षेत्र में विष्णुपद, फल्गु नदी और अन्य पिंड वेदियों का धार्मिक महत्व बताया गया है। यह सभी बातें धार्मिक ग्रंथों और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं।



