यूपी में SIR के बाद छूटे नाम जुड़ेंगे वोटर लिस्ट में, घर-घर जाएंगे BLO

उत्तर प्रदेश में SIR के बाद मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान करना है, जिनका नाम मौजूदा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है।
बीएलओ SIR से पहले प्रकाशित मतदाता सूची और वर्तमान सूची का मिलान करेंगे। जिन लोगों का नाम पहले की सूची में था, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं है, उनकी स्थिति का घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा।
सत्यापन के दौरान यदि कोई व्यक्ति पात्र पाया जाता है और उसका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो उसका फॉर्म-6 भरवाया जाएगा। फॉर्म-6 के जरिए नए पात्र मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
अभियान में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बीएलओ को प्रत्येक सप्ताह करीब 20 से 25 ऐसे मतदाताओं से संपर्क करने का लक्ष्य दिया गया है और पूरी प्रक्रिया को लगभग एक महीने में पूरा करने की योजना है।
शादी के बाद दूसरे क्षेत्र में चली गईं ऐसी महिलाओं के नाम भी अभियान के दौरान मतदाता सूची में जोड़ने पर जोर रहेगा, जिनका नाम नए क्षेत्र की सूची में अभी तक दर्ज नहीं हुआ है। इसके अलावा पात्र बेघर और वंचित वर्ग के लोगों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए बूथ स्तर पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। आश्रय स्थलों और श्रमिक कॉलोनियों में रहने वाले पात्र लोगों तक पहुंचने के लिए भी विशेष कैंप आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अभियान के दौरान तैयार की गई नई सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा करने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य नाम जोड़ने की प्रक्रिया में किसी आपत्ति या त्रुटि की जानकारी मिलने पर उसे समय रहते दूर करना है।
बीएलओ घर-घर सत्यापन के दौरान भरे गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की ऑनलाइन एंट्री भी करेंगे। इससे अभियान की प्रगति की राज्य स्तर पर निगरानी की जा सकेगी।
जो पात्र नागरिक बीएलओ के घर पहुंचने का इंतजार नहीं करना चाहते, वे चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल या ECINET ऐप के माध्यम से भी फॉर्म-6 ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
चुनाव आयोग के इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि SIR के बाद कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के अवसर से वंचित न रहे। अभियान की निगरानी मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर पर की जाएगी।



