Jio IPO से Meta और Google को ₹1 लाख करोड़ का पेपर प्रॉफिट, 2020 में किया था निवेश

भारतीय शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर चर्चा तेज है। इस आईपीओ का फायदा केवल कंपनी और उसके प्रमुख निवेशकों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि साल 2020 में जियो में पैसा लगाने वाली वैश्विक टेक कंपनियों के निवेश मूल्य में भी बड़ी बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। Meta और Google ने छह साल पहले जियो प्लेटफॉर्म्स में कुल लगभग ₹77,310 करोड़ का निवेश किया था। अब प्रस्तावित आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर उनकी हिस्सेदारी की संयुक्त कीमत करीब ₹1.77 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है। इस हिसाब से दोनों कंपनियों के निवेश पर लगभग ₹99,841 करोड़ का अनुमानित लाभ बनता है।
Meta ने जियो में कितना पैसा लगाया था?
Meta, जो पहले Facebook के नाम से जानी जाती थी, ने साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स में करीब ₹43,574 करोड़ का निवेश किया था। इस निवेश के बदले कंपनी को लगभग 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली थी। प्रस्तावित आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड ₹1,119 प्रति शेयर के आधार पर Meta की हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹99,846 करोड़ आंका गया है। इस तरह शुरुआती निवेश और मौजूदा अनुमानित मूल्य के बीच लगभग ₹56,272 करोड़ का अंतर दिखाई देता है। यह गणना आईपीओ के प्रस्तावित मूल्य पर आधारित है और बाजार में शेयरों की वास्तविक कीमत बदलने पर इसमें भी बदलाव हो सकता है।
Google के निवेश की वैल्यू कितनी बढ़ी?
Google ने भी साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स में करीब ₹33,737 करोड़ लगाए थे। इसके बदले उसे लगभग 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली। प्रस्तावित आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर Google की हिस्सेदारी की कीमत लगभग ₹77,307 करोड़ हो सकती है। इस हिसाब से उसके निवेश पर करीब ₹43,569 करोड़ का अनुमानित पेपर प्रॉफिट बनता है। Meta और Google के निवेश की वैल्यू में हुई यह बढ़ोतरी जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार और बाजार में उसके मूल्यांकन को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी को दर्शाती है।
क्या Meta और Google ने बेच दिए अपने शेयर?
इस खबर में सबसे अहम बात यह है कि अनुमानित लाभ के बावजूद Meta और Google प्रस्तावित आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना नहीं बना रही हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ के तहत नए शेयर जारी किए जाने हैं और दोनों कंपनियां अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बनाए रखेंगी। इसलिए करीब ₹1 लाख करोड़ का लाभ फिलहाल निवेश के मूल्यांकन में बढ़ोतरी है। इसे वास्तविक नकद मुनाफा नहीं माना जा सकता, क्योंकि शेयर बेचने पर ही निवेशक उस मूल्य का लाभ हासिल कर पाएंगे।
जियो आईपीओ का संभावित आकार और वैल्यूएशन
रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ लगभग ₹30,213 करोड़ का हो सकता है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का मूल्यांकन करीब ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यदि यह मूल्यांकन आईपीओ के दौरान कायम रहता है, तो यह भारत के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है। हालांकि, आईपीओ से जुड़ी कीमत, अंतिम शर्तों और लिस्टिंग के बाद शेयर के प्रदर्शन को लेकर वास्तविक स्थिति बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
2020 में जियो पर वैश्विक कंपनियों ने क्यों लगाया था दांव?
साल 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने कई वैश्विक निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई थी। उस समय भारत में डिजिटल सेवाओं, मोबाइल इंटरनेट और ऑनलाइन कारोबार के विस्तार को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही थी। Meta और Google जैसे बड़े टेक समूहों के निवेश ने जियो के डिजिटल कारोबार की संभावनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। अब प्रस्तावित आईपीओ के जरिए कंपनी के मूल्यांकन को सार्वजनिक बाजार में एक नया आधार मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या है इस खबर का मतलब?
Meta और Google के निवेश मूल्य में अनुमानित बढ़ोतरी यह दिखाती है कि किसी कंपनी में शुरुआती चरण में किया गया निवेश समय के साथ कितना मूल्यवान हो सकता है। लेकिन पेपर प्रॉफिट को सुनिश्चित कमाई समझना सही नहीं होगा। आईपीओ का अंतिम मूल्य, बाजार की मांग, लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत और भविष्य में हिस्सेदारी बेचने की स्थिति वास्तविक लाभ को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जियो आईपीओ पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए निवेश मूल्यांकन और वास्तविक मुनाफे के बीच अंतर समझना जरूरी है।



