सितंबर में म्यूचुअल फंड से ₹1.33 लाख करोड़ की निकासी, स्मॉल-कैप में सबसे ज्यादा निवेश

सितंबर में डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से करीब ₹1.83 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई। इसमें लिक्विड फंड से ₹95,743 करोड़ और मनी मार्केट फंड से ₹50,846 करोड़ निकाले गए। डेट फंड से हुई इस बड़ी निकासी ने इक्विटी योजनाओं में आए निवेश को पीछे छोड़ दिया, जिसके चलते पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल नेट फ्लो नकारात्मक रहा।
स्मॉल-कैप फंड में निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी
इक्विटी म्यूचुअल फंड की श्रेणियों में स्मॉल-कैप फंड को सबसे ज्यादा निवेश मिला। सितंबर में इस कैटेगरी में करीब ₹9,039 करोड़ का शुद्ध निवेश आया। मिड-कैप फंड में ₹7,835 करोड़ और फ्लेक्सी-कैप फंड में ₹6,702 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों ने इस दौरान छोटी और मध्यम कंपनियों पर केंद्रित फंडों में भी रुचि दिखाई।
इक्विटी फंड में बढ़ा निवेश
डेट फंड से भारी निकासी के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश का रुझान मजबूत रहा। सितंबर में इक्विटी योजनाओं में ₹38,307 करोड़ का शुद्ध निवेश आया, जो अगस्त के ₹29,329 करोड़ से लगभग 31 प्रतिशत अधिक था। लार्ज-कैप फंड भी अगस्त में निकासी के बाद सितंबर में सकारात्मक स्थिति में लौटे और इनमें ₹859 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ।
SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश सितंबर में बढ़कर ₹32,490 करोड़ पहुंच गया। अगस्त में यह आंकड़ा ₹32,297 करोड़ था। SIP के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशकों ने नियमित निवेश जारी रखा। हालांकि, किसी एक महीने के आंकड़े से भविष्य के रिटर्न का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
म्यूचुअल फंड चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान?
स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड में निवेश की दिलचस्पी बढ़ने के बावजूद निवेशकों को जोखिम, फंड के निवेश उद्देश्य, खर्च अनुपात और निवेश की अवधि पर ध्यान देना चाहिए। स्मॉल-कैप फंड में बाजार के उतार-चढ़ाव का असर अधिक हो सकता है। किसी फंड का चुनाव केवल हालिया निवेश आंकड़ों या पिछले प्रदर्शन के आधार पर करने के बजाय अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार करना बेहतर है।
नोट: यह सामग्री सामान्य वित्तीय जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की व्यक्तिगत सलाह नहीं।



