Hormuz Strait Closed: 21 मील की पट्टी से दुनिया की धड़कन, भारत में पेट्रोल-डीजल और बाजार पर क्या असर?

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा जिस संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, वह है Strait of Hormuz। यह लगभग 21 मील चौड़ा जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का बड़ा भाग इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यदि होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने या बाधित होने की खबर आती है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मच जाती है।
भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करते हैं, सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। अगर इस मार्ग से तेल आपूर्ति रुकती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा और परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई में उछाल आ सकता है। खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक, हर क्षेत्र में कीमतों का दबाव महसूस हो सकता है।
शेयर बाजार भी ऐसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। तेल की कीमतों में तेजी से ऊर्जा, एविएशन, पेंट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों पर दबाव बन सकता है। वहीं, तेल उत्पादक कंपनियों या वैकल्पिक ऊर्जा से जुड़ी कंपनियों को फायदा भी हो सकता है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने से बाजार में अस्थिरता देखी जा सकती है। विदेशी निवेश प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है, जिससे रुपया दबाव में आ सकता है।
हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने और आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में कदम उठाए हैं, जिससे तत्काल संकट की स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है। फिर भी, होरमुज जलडमरूमध्य का महत्व इतना बड़ा है कि वहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इसलिए 21 मील का यह समुद्री रास्ता वास्तव में दुनिया की ऊर्जा धड़कन को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है।



