
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के तहत अब तक करीब 25 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जा चुके हैं। चुनाव आयोग की इस कवायद का उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत, स्थानांतरित या दोहरे नामों को हटाना और वास्तविक पात्र मतदाताओं का नाम सही तरीके से दर्ज रखना है। इस प्रक्रिया में जिन मतदाताओं के पते, उम्र, नाम या अन्य विवरणों को लेकर संदेह पाया गया है, उन्हें नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 28 जनवरी की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें इस तारीख तक संबंधित बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) या निर्धारित केंद्र पर जाकर अपना पक्ष रखना होगा। समय पर जवाब न देने की स्थिति में मतदाता सूची से नाम हटने की संभावना भी बन सकती है। इसलिए मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ समय सीमा के भीतर सत्यापन कराएं।
SIR अभियान के दौरान घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और अद्यतन रहे। इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं को जोड़ने, नामों में सुधार करने और गलत प्रविष्टियों को हटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद अहम है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़ी संख्या में नोटिस जारी होना इस बात का संकेत है कि आयोग किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से ले रहा है। वहीं, आम मतदाताओं के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने मतदाता कार्ड से जुड़ी जानकारी की जांच करें और किसी भी त्रुटि को समय रहते ठीक कराएं।
अगर आपको भी SIR के तहत नोटिस मिला है, तो 28 जनवरी की तारीख याद रखें। यह न केवल आपके मताधिकार की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में आपका योगदान भी है। समय पर कार्रवाई कर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित और सही बना रहे।



