बांग्लादेश को भारत ने भेजे 18 रेल कोच, जानिए खासियत

भारत और बांग्लादेश के बीच रेलवे सहयोग के तहत 18 आधुनिक यात्री रेल कोच की पहली खेप रवाना की गई है। इन कोचों का निर्माण पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में किया गया है। भारतीय रेलवे की निर्यात और तकनीकी सेवाओं से जुड़ी सरकारी कंपनी RITES लिमिटेड इस परियोजना को पूरा कर रही है। यह खेप बांग्लादेश रेलवे के लिए कुल 200 ब्रॉडगेज कोच उपलब्ध कराने की योजना का हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह नई खेप पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद इस समझौते के तहत भेजी गई पहली खेप है।
₹915 करोड़ का है रेलवे समझौता
भारत और बांग्लादेश के बीच 200 यात्री कोचों की आपूर्ति के लिए लगभग ₹915 करोड़ का अनुबंध किया गया है। मई 2024 में दिए गए इस ठेके को यूरोपीय निवेश बैंक की वित्तीय सहायता वाले प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है। समझौते के तहत दिसंबर 2027 तक सभी 200 कोचों की आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। इस परियोजना का उद्देश्य बांग्लादेश रेलवे के यात्री कोच बेड़े को बेहतर बनाना और रेल सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में मदद करना है।
18 कोचों में कौन-कौन से डिब्बे शामिल हैं?
पहली खेप में अलग-अलग श्रेणी के 18 कोच शामिल हैं। इनमें 11 नॉन-एसी शोवन चेयर कार, तीन एसी चेयर कार, दो एसी स्लीपर कार और दो एसी पावर कार हैं। पावर कार में गार्ड के लिए अलग जगह और सामान रखने की व्यवस्था की गई है। इन कोचों को बांग्लादेश रेलवे की परिचालन जरूरतों और वहां की विद्युत प्रणाली के अनुसार तैयार किया गया है, ताकि उन्हें स्थानीय रेल नेटवर्क में इस्तेमाल किया जा सके।
यात्रियों की सुविधा के लिए खास इंतजाम
इन आधुनिक कोचों में यात्रियों के आराम और सुरक्षा को ध्यान में रखकर कई सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें आरामदायक रिक्लाइनिंग सीटें, स्टेनलेस स्टील के आर्मरेस्ट और फुटरेस्ट, सीसीटीवी निगरानी और यात्री अलार्म सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं हैं। इसके अलावा बेबी केयर रूम और प्रार्थना कक्ष भी उपलब्ध कराए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा को यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है।
बांग्लादेश की जरूरतों के अनुसार किया गया डिजाइन
किसी दूसरे देश को रेल कोच उपलब्ध कराने के लिए केवल डिब्बे तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। कोचों को संबंधित देश के रेलवे नेटवर्क, बिजली आपूर्ति और परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप बनाना पड़ता है। इस परियोजना में भी बांग्लादेश रेलवे की जरूरतों के अनुसार तकनीकी बदलाव किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कोचों की छत को भी वहां की परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मजबूत बनाया गया है। हालांकि, वास्तविक सुरक्षा और संचालन का आकलन संबंधित परीक्षणों तथा निरीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।
2027 तक बांग्लादेश को मिलेंगे कुल 200 कोच
समझौते के अनुसार, पहली खेप के बाद बाकी कोचों की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। दिसंबर 2027 तक कुल 200 कोच भेजने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बांग्लादेश रेलवे को अतिरिक्त यात्री डिब्बे मिलेंगे और जरूरत के अनुसार नई ट्रेन सेवाएं शुरू करने या मौजूदा सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नई ट्रेनों के संचालन का फैसला बांग्लादेश रेलवे की तैयारियों और संबंधित मार्गों की जरूरतों पर निर्भर करेगा।
भारत के रेलवे उद्योग के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
यह परियोजना भारत में निर्मित रेल कोचों की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति और रेलवे क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को भी सामने लाती है। RITES विभिन्न देशों को रेल परिवहन से जुड़े उपकरण और सेवाएं उपलब्ध कराती है। बांग्लादेश को कोचों की आपूर्ति से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को निर्यात का अवसर मिलता है, जबकि पड़ोसी देश को अपने यात्री रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण में मदद मिल सकती है। इस तरह का सहयोग दोनों देशों के बीच परिवहन संपर्क और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है।



