रुपया गिरने पर सरकार भी चिंतित, पीयूष गोयल ने बताई वजह
भारतीय रुपये की कमजोरी इन दिनों अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने रुपये में गिरावट को लेकर सरकार की चिंता को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। उन्होंने स्टॉक ब्रोकरों की एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिस तरह निवेशक रुपये की गिरावट को लेकर चिंतित हैं, सरकार भी इसे लेकर चिंतित है।
96 रुपये के करीब कारोबार
22 सितंबर 2026 को शुरुआती कारोबार में रुपया 95.75 प्रति डॉलर पर खुला और 95.65 तक मजबूत हुआ। बाद में मुद्रा में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान यह करीब 95.80 प्रति डॉलर के स्तर पर था। सोमवार को रुपया 95.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की दिशा रुपये पर असर डाल रही है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई थी, हालांकि इसमें कुछ नरमी भी देखी गई।
कमजोर रुपये से क्या असर पड़ता है?
रुपये में गिरावट का असर उन वस्तुओं और सेवाओं पर पड़ सकता है जिनके लिए भारत को विदेशों से भुगतान करना पड़ता है। खासतौर पर कच्चे तेल, कुछ औद्योगिक कच्चे माल और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत डॉलर में बढ़ सकती है।
अगर आयात महंगा होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ने की स्थिति में इसका कुछ असर उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ, कमजोर रुपया भारतीय निर्यातकों के लिए कुछ परिस्थितियों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ दे सकता है, क्योंकि डॉलर में मिलने वाली आय को रुपये में बदलने पर अधिक रकम मिल सकती है।
RBI की भूमिका भी अहम
रुपये की चाल को स्थिर रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हाल के दिनों में RBI ने बाजार में हस्तक्षेप के साथ-साथ बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त तरलता को कम करने के लिए बॉन्ड बिक्री और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसे कदम भी उठाए हैं।
Reuters के अनुसार, RBI की विभिन्न कार्रवाइयों के बाद बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी का सरप्लस काफी कम हुआ है। इससे मौद्रिक परिस्थितियों को सामान्य करने और रुपये पर दबाव को नियंत्रित करने की कोशिशों का संकेत मिलता है।
कच्चे तेल और डॉलर पर नजर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव बन सकता है। मंगलवार को तेल की कीमतों में कुछ नरमी ने रुपये को शुरुआती कारोबार में सहारा दिया।
वहीं अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों ने आने वाले कारोबार में 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है।
सरकार और RBI के सामने चुनौती
रुपये की विनिमय दर किसी एक कारक से तय नहीं होती। वैश्विक डॉलर की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी पूंजी का प्रवाह, व्यापार संतुलन और घरेलू मौद्रिक परिस्थितियां मिलकर इसकी दिशा प्रभावित करती हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से रुपये की कमजोरी को लेकर चिंता जताई गई है, जबकि RBI बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए विभिन्न उपाय कर रहा है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा रुपये के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे।



