
मेघालय में कोयला खदान में हुए भीषण धमाके ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ताजा जानकारी के मुताबिक इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है, जबकि कई अन्य मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार घटनास्थल पर अभियान चला रहे हैं, लेकिन खदान के भीतर भरे पानी, जहरीली गैस और मलबे की वजह से ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। शुरुआती आशंका है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध खनन गतिविधियां इस दुर्घटना की बड़ी वजह हो सकती हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है तथा घायलों के समुचित इलाज का भरोसा दिलाया है। घटना के बाद खनन क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से इन खदानों में जोखिम भरे हालात में काम कराया जा रहा था, जिस पर सख्ती से निगरानी की जरूरत है। न्यायिक जांच से उम्मीद है कि सच सामने आएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता जता रहे हैं।



