
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की पांचवीं वर्षगांठ से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि रूस आखिर क्यों यह युद्ध लड़ रहा है। पुतिन के अनुसार, यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं बल्कि रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा, ऐतिहासिक पहचान और रणनीतिक हितों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और नाटो के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग रूस के लिए खतरे की घंटी था। पुतिन का दावा है कि नाटो का पूर्व की ओर विस्तार रूस की सीमाओं तक पहुंच गया, जिससे मॉस्को को अपनी सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने पड़े।
रूस का यह भी तर्क है कि पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में रहने वाले रूसी भाषी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। पुतिन ने कहा कि 2014 के बाद से वहां के लोगों को कथित तौर पर भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ा, जिसे रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी हो गई। हालांकि यूक्रेन और पश्चिमी देश इन आरोपों को खारिज करते हैं और इसे रूस की आक्रामक नीति बताते हैं।
यह युद्ध 2022 में तब तेज हुआ जब रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। तब से लेकर अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन पुतिन का कहना है कि इन प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था टिकाऊ बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच की लड़ाई नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की भी परीक्षा है। एक ओर पश्चिमी देश यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद दे रहे हैं, तो दूसरी ओर रूस इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई बता रहा है। पांचवीं वर्षगांठ के मौके पर पुतिन का बयान यह संकेत देता है कि रूस फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है और वह अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा किए बिना युद्ध समाप्त करने को तैयार नहीं दिखता। ऐसे में आने वाले समय में इस संघर्ष का समाधान कूटनीतिक वार्ता से होगा या फिर यह और लंबा खिंचेगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है।



