
ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद जम्मू-कश्मीर में फिर से आतंकी हलचल बढ़ने लगी है। सुरक्षा एजेंसियों को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद एक बार फिर से बड़े हमले की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि दोनों संगठन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मिलकर सीमा पार से आतंकियों को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इन संगठनों का मकसद भारतीय सुरक्षा बलों पर हमला करना और घाटी में अशांति फैलाना है।
खुफिया सूत्रों ने खुलासा किया है कि जैश और लश्कर के हैंडलर पाकिस्तान के पंजाब और रावलपिंडी इलाकों से अपने नेटवर्क को सक्रिय कर रहे हैं। उन्होंने सीमा पार के लॉन्च पैड पर 25 से अधिक आतंकियों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया है, जिन्हें सर्दियों की शुरुआत से पहले भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की योजना बनाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस सूचना के बाद जम्मू, पुंछ, राजौरी और कुपवाड़ा सेक्टर में सतर्कता बढ़ा दी है।
ऑपरेशन सिंदूर, जो छह महीने पहले भारतीय सेना द्वारा सफलतापूर्वक चलाया गया था, में कई आतंकियों का सफाया किया गया था और उनके नेटवर्क को ध्वस्त किया गया था। उस अभियान के बाद घाटी में शांति का माहौल बना था, लेकिन अब लश्कर और जैश की सक्रियता ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। सेना और खुफिया विभाग लगातार ड्रोन मूवमेंट, संदिग्ध कॉल्स और सोशल मीडिया ट्रैफिक पर नजर रख रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इन संगठनों को दोबारा सक्रिय करने में लगी है ताकि जम्मू-कश्मीर में आतंक का माहौल पैदा किया जा सके। केंद्र सरकार ने सभी सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रहने और हर संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
भारतीय सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि हमारी तैयारी पूरी है और कोई भी आतंकी साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी। स्थानीय प्रशासन और नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
जम्मू-कश्मीर में लश्कर और जैश की यह नई साजिश भारत की सुरक्षा व्यवस्था की एक और परीक्षा मानी जा रही है, लेकिन सेना का कहना है कि इस बार आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य तय किया जा चुका है।



