
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीपफेक तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए सरकार ने नई गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिनके तहत किसी भी आपत्तिजनक या झूठे वीडियो, ऑडियो और इमेज को केवल तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। ये नियम 20 फरवरी से लागू होंगे और इसका मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों, डिजिटल धोखाधड़ी और समाज में फैल रही गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना है। अधिकारियों के अनुसार, डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। नई गाइडलाइन्स के तहत प्लेटफॉर्म और कंटेंट प्रदाता यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान होने के तुरंत बाद उसे हटाया जाए, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने कहा है कि डीपफेक और AI-सृजित कंटेंट अब सिर्फ मनोरंजन या शैक्षणिक उद्देश्य तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इसका गलत उपयोग लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने, राजनीतिक माहौल बिगाड़ने और आर्थिक अपराधों में बढ़ोतरी करने के लिए किया जा रहा है। नई व्यवस्था में शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासन को तीन घंटे का समय मिलेगा, जबकि प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल दुनिया में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
साथ ही, सरकार ने प्लेटफॉर्म संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे AI और डीपफेक सामग्री की पहचान के लिए तकनीकी उपाय अपनाएं और प्रशिक्षित मॉडरेटर्स की नियुक्ति करें। जनता को भी जागरूक किया जाएगा कि वे संदिग्ध सामग्री की रिपोर्ट करें। इस नीति का उद्देश्य सिर्फ सख्ती दिखाना नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और नैतिकता को बनाए रखना है। इसके लागू होने से न केवल आपत्तिजनक कंटेंट में कमी आएगी, बल्कि सोशल मीडिया पर भरोसेमंद और सुरक्षित जानकारी का प्रवाह भी सुनिश्चित होगा।
कुल मिलाकर, AI-डीपफेक सामग्री पर यह नया नियम तकनीकी और कानूनी दोनों दृष्टियों से समय की मांग है और इसे देश में डिजिटल मीडिया के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।



