भारतीय मूल के डॉक्टर और पायलट अनिल मेनन को NASA ने अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के लिए नियुक्त किया है। यह नियुक्ति भारतीय समुदाय के लिए गर्व की बात है, क्योंकि अनिल मेनन पहले SpaceX में फ्लाइट सर्जन रह चुके हैं और अब वह NASA के अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बनेंगे। NASA ने हाल ही में इस मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों की सूची जारी की, जिसमें अनिल मेनन का नाम प्रमुखता से शामिल है। उनकी यह नई भूमिका उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर भेजने की दिशा में एक अहम कदम है। अनिल मेनन की नियुक्ति से यह साफ है कि वैज्ञानिक प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती और भारतीय मूल के लोग वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में लगातार अपना परचम लहरा रहे हैं।
अनिल मेनन भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं, जो एक प्रशिक्षित डॉक्टर, पायलट और अब NASA के एस्ट्रोनॉट हैं। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोसाइंस में ग्रेजुएशन और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री प्राप्त की है। अनिल मेनन अमेरिकी वायु सेना में फ्लाइट सर्जन रह चुके हैं और SpaceX के मेडिकल डायरेक्टर के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनका तकनीकी और मेडिकल ज्ञान उन्हें अंतरिक्ष मिशन के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाता है।
NASA हर कुछ वर्षों में नए अंतरिक्ष यात्रियों को चुनता है। इसके लिए सैकड़ों उम्मीदवारों में से गहन परीक्षण, मेडिकल चेकअप और प्रशिक्षण के बाद चयन किया जाता है। अनिल मेनन को 2021 में NASA के नए एस्ट्रोनॉट क्लास के लिए चुना गया था और अब उनकी पहली उड़ान की घोषणा की गई है। यह मिशन उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर भेजेगा, जहाँ वे वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परीक्षणों में हिस्सा लेंगे।
अनिल मेनन की इस ऐतिहासिक नियुक्ति से एक बार फिर यह साबित होता है कि भारतीय मूल के वैज्ञानिक विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उनसे पहले कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसे अंतरिक्ष यात्री भी NASA के मिशनों में हिस्सा ले चुके हैं। अनिल की यह उपलब्धि भारत-अमेरिका वैज्ञानिक संबंधों को भी और प्रगाढ़ बनाएगी।
यह मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देना, माइक्रोग्रैविटी में शरीर पर प्रभावों का अध्ययन करना, और भविष्य के चंद्रमा व मंगल अभियानों के लिए जरूरी तकनीकी परीक्षण करना है। अनिल मेनन की मेडिकल पृष्ठभूमि उनके इस मिशन को और भी महत्वपूर्ण बना देती है क्योंकि वे अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य से जुड़े प्रयोगों में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।



