
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया और कुछ अपुष्ट स्रोतों में यह दावा किया गया कि भारत ने इस सैन्य अभियान के दौरान पाकिस्तान (PAK) के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया था। हालांकि, आधिकारिक और विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। भारत सरकार या भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से ऐसा कोई बयान या पुष्टि कभी नहीं की गई है, जिससे यह साबित हो कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया हो।
दरअसल, भारत की सैन्य नीति हमेशा से जिम्मेदार और संतुलित रही है, खासकर तब जब बात परमाणु हथियारों से लैस किसी पड़ोसी देश की हो। भारत “नो फर्स्ट यूज़” (पहले परमाणु हथियार का प्रयोग न करने) की नीति का पालन करता है और किसी भी सैन्य कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीतिक संतुलन का पूरा ध्यान रखता है। पाकिस्तान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर संकट पैदा कर सकता था, जिसे भारत जैसे जिम्मेदार राष्ट्र द्वारा अंजाम देना व्यावहारिक नहीं माना जाता।
ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य, उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, सीमित और सटीक सैन्य कार्रवाई तक ही सीमित था। इसका फोकस आतंकी ढांचों, लॉजिस्टिक सपोर्ट और उन ठिकानों पर था, जहां से भारत की सुरक्षा को सीधा खतरा उत्पन्न हो रहा था। इस तरह के ऑपरेशन में परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना रणनीतिक रूप से भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे संघर्ष अनियंत्रित रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर ठिकाने अत्यंत सुरक्षित और गुप्त स्थानों पर स्थित हैं, जिन पर किसी भी प्रकार के हमले की जानकारी तुरंत अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और सैटेलाइट निगरानी के जरिए सामने आ जाती। यदि ऐसा कोई हमला हुआ होता, तो उसकी गूंज सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलतीं।
इसलिए यह स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा पाकिस्तान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले की खबरें महज अफवाह हैं। आम नागरिकों को चाहिए कि वे ऐसी संवेदनशील खबरों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों और प्रमाणित जानकारी पर ही विश्वास करें, ताकि भ्रम और अनावश्यक डर का माहौल न बने।



